श्राद्ध कब , क्यो और कैसे करें ,जाने कौन कर सकता है तर्पण

ओम आगच्छन्तु पितर एवं ग्रहन्तु जलान्जलिम हे पितरों! पधारिये पितरों तथा जलांजलि ग्रहण कीजिए। पितृपक्ष में पितर स्वर्ग से उतरकर धरती पर वाश करेंगे। इस बार सोलह के स्थान पर...

अजा एकादशी व्रत करने की विधि ,महत्व और कथा

घर में पूजा की जगह पर या पूर्व दिशा में किसी साफ जगह पर गौमूत्र छिड़ककर वहां गेहूं रखें। फिर उस पर तांबे का लोटा यानी कि कलश रखें। लोटे...

पुत्रदा एकादशी व्रत, कथा एवं महत्व ( क्या मिलता है फल जाने)

युधिष्ठिर ने  पूछा- हे भगवान! आपने कमदा  एकादशी का  महत्व बता कर हम बड़ी  कृपा की। अब कृपा करके यह बतलाइए कि सावन मास की  शुक्ल पक्ष की  एकादशी  क्या...

अमर कथा (भगवत कथा) जो महादेव ने पर्वती जी को सुनाई

एक बार की बात है भगवान शिव कैलाश पर्वत पर ध्यान लगाए बैठे थे उसी समय माता पर्वती भगवान के पास आती है, उन्हें प्रणाम करती है और  हाथ जोड़कर ...

कामदा एकादशी का व्रत कथा एवं महत्व

कामदा एकादशी जिसे फलदा एकादशी भी कहते हैं, श्री विष्णु का उत्तम व्रत कहा गया है. इस व्रत के पुण्य से जीवात्मा को पाप से मुक्ति मिलती है. यह एकादशी...

गौमाता की विलक्षण महिमा

” जय श्री कृष्ण , जय गौ माता “ नास्ति मातृसमा छाया, नास्ति मातृसमा गति: । नास्ति मातृसमं त्राणं, नास्ति मातृसमा प्रिया ॥ ” माता के तुल्य कोई छाया नहीँ...

शिव मानस पूजा (शिव जी की मानसिक पूजा)

रत्नौ: कल्पित  मासनं हिम-जलै: स्नानं च दिव्याम्बरं नान -रत्न विभूषितमं मृगमदामोदांकितं चन्दनं । जाती -चम्पक -बिल्व-पत्र रचितं पुष्पं च धूपं तथा, दीपं देव दयानिधे पशुपते हृत -कल्पित गृह्लाताम् ।। (1)...

विजया एकादशी का महत्व ( पूजा,व्रत कथा)

फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम विजया एकादशी है  विजया एकादशी का विशेष महत्व है इस व्रत को करने से मानव अपने जीवन में ,अपने लक्ष्य में विजय...

यज्ञ का महत्व

परमात्मा ने सृष्टि के निर्माण के साथ यज्ञ का ज्ञान दिया और अनिवार्य रूप से यज्ञ करने का आदेश भी दिया । तभी से यज्ञ करने की परम्पराएँ भी बनी...

दैव सम्पत्ति और आसुर सम्पत्ति

अभयं सत्तवसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थिति: । दानं दमश्च स्वाध्यायस्तप ।।1।। अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्याग: शान्तिरपैशुनम् । दया भूतेष्वलोलुप्त्वं मार्दवं ह्नीरचापलम्।।2। तेज: क्षमा घृति: शौचमद्रोहो नातिमानिता । भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत ।।3।। भगवान श्रीकृष्ण कहते है...