Category: ज्ञान ज्योति

श्री हरि को प्रिय अपने भक्त

काकभुशुण्डि जी की स्तुति करने से श्रीहरि बहुत प्रसन्न हुए और कहने लगे कि हे काक अब मैं तुमको अपना निज सिद्धांत सुनाता हूँ । इसे सुनकर तुम अपने मन...

शिव तांडव स्तोत्रम

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपातिस्थले गलेवलम्ब्य लाम्बितां भुजगंतुग्डमालिकाम्। डमड्डमडमडमन्निनादवड्मर्वयं चकार चण्डताण्डवं तनोतु न: शिव: शिवम् ।।(1)।। जटाकटाहसम्भ्रमन्निलिम्पनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि। धगद्धगद्धगज्जवलल्ललाटपट्टपावके किशोरचन्द्रशेखरे रति: प्रतिक्षणं मम ।।(2)।। धराधरेन्द्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुरा स्फुरध्दगन्तसन्ततिप्रमोदमान मानसे। कृपाकटाक्षधोरणीनिरूद्धर्धरापदि क्वचिच्चिदम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ।।(3)।।...

हनुमानजी की भगवान श्रीरामजी से भेंट

बात उस समय की हैं जब भगवान श्रीराम चौदह बर्ष के वनवास में थे। और हनुमान जी सुग्रीव आदि वानरों के साथ ऋष्यमूक पर्वत पर रहते थे। उस समय भगवान...

माता सती का भ्रम एवं उनका संदेह

एक बार की बात है त्रेता युग में भगवान शिव माता सती के साथ बिहार करते हुए अगस्त्य ऋषि के आश्रम मे पहुँचे जगतजननी भवानी माता सती को शिव के...