Category: ज्ञान ज्योति

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शरद पूर्णिमा व्रत विधि, महत्व एवं खीर रखने का है विधान

इस बार 13 अक्टूबर 2019 को शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा यानी कल सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत बरसाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा साल भर में शरद पूर्णिमा...

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माता अनुसूया की पौराणिक कथा

अत्रि ऋषि की पत्नी और सती अनुसूया की कथा से अधिकांश धर्मालु परिचित हैं। उन की पति भक्ति तो लोक प्रचलित और पौराणिक भी है। जिसमें त्रिदेव ने उनकी परीक्षा...

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प्रदोष व्रत पूजा, अनुष्ठान, व्रत का महत्व एवं लाभ

प्रदोष व्रत को देश के विभिन्न हिस्सों में लोग पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ इस व्रत का पालन करते हैं। यह व्रत भगवान शिव और देवी पार्वती के सम्मान...

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पापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi) की कथा, व्रत विधि एवं महत्व

पापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi) का हिन्‍दू धर्म में बड़ा महात्‍म्‍य है. इस दिन सृष्टि के रचयिता भगवान विष्‍णु की पूजा और मौन रहकर भगवद् स्मरण तथा भजन-कीर्तन करने का विधान...

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शिव मानस पूजा (शिव जी की मानसिक पूजा)

रत्नौ: कल्पित  मासनं हिम-जलै: स्नानं च दिव्याम्बरं नान -रत्न विभूषितमं मृगमदामोदांकितं चन्दनं । जाती -चम्पक -बिल्व-पत्र रचितं पुष्पं च धूपं तथा, दीपं देव दयानिधे पशुपते हृत -कल्पित गृह्लाताम् ।। (1)...

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श्री हरि को प्रिय अपने भक्त

काकभुशुण्डि जी की स्तुति करने से श्रीहरि बहुत प्रसन्न हुए और कहने लगे कि हे काक अब मैं तुमको अपना निज सिद्धांत सुनाता हूँ । इसे सुनकर तुम अपने मन...

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शिव तांडव स्तोत्रम

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपातिस्थले गलेवलम्ब्य लाम्बितां भुजगंतुग्डमालिकाम्। डमड्डमडमडमन्निनादवड्मर्वयं चकार चण्डताण्डवं तनोतु न: शिव: शिवम् ।।(1)।। जटाकटाहसम्भ्रमन्निलिम्पनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि। धगद्धगद्धगज्जवलल्ललाटपट्टपावके किशोरचन्द्रशेखरे रति: प्रतिक्षणं मम ।।(2)।। धराधरेन्द्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुरा स्फुरध्दगन्तसन्ततिप्रमोदमान मानसे। कृपाकटाक्षधोरणीनिरूद्धर्धरापदि क्वचिच्चिदम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ।।(3)।।...

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केवट प्रसंग

कथा भगवान राम के वनवास के समय की है रामजी वनवास जा रहे थे और उनकी सारी प्रजा दु:खी हो रही थी जिनके वियोग में पशु-पक्षी इतने व्याकुल हो रहे...

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हनुमानजी की भगवान श्रीरामजी से भेंट

बात उस समय की हैं जब भगवान श्रीराम चौदह बर्ष के वनवास में थे। और हनुमान जी सुग्रीव आदि वानरों के साथ ऋष्यमूक पर्वत पर रहते थे। उस समय भगवान...

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माता सती का भ्रम एवं उनका संदेह

एक बार की बात है त्रेता युग में भगवान शिव माता सती के साथ बिहार करते हुए अगस्त्य ऋषि के आश्रम मे पहुँचे जगतजननी भवानी माता सती को शिव के...