Category: ज्ञान ज्योति

चैत्र मास शुक्ल प्रतिपदा को नवरात्रे,घट स्थापना का शुभ मुहूर्त,पूजा विधि,देवी मां के नौ रूप

चैत्र मास शुक्ल प्रतिपदा 25 मार्च बुधवार से विक्रम नवसंत्सवर 2077 की शुरुआत होगी। इसी दिन से वासंतिक नवरात्र भी शुरू होगा। इस बार के नवसंवत्सर का नाम प्रमादी है।...

महाशिवरात्रि कब और क्‍यों मनाई जाती है,पूजन विधि, व्रत कथा।

महाशिवरात्रि (Mahashivratri) हिन्‍दू धर्म के प्रमुख त्‍योहरों में से एक है।शिव भक्‍त साल भर अपने आराध्‍य भोले भंडारी की विशेष आराधना के लिए इस दिन की प्रतीक्षा करते हैं। इस...

वसंत पंचमी में सरस्वती पूजा कथा,वसंत पंचमी की विशेषता और महत्व

भारतीय गणना के अनुसार वर्ष भर में पड़ने वाली छह ऋतुओं (वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर) में वसंत को ऋतुराज अर्थात सभी ऋतुओं का राजा माना गया है। पंचमी...

शरद पूर्णिमा व्रत विधि, महत्व एवं खीर रखने का है विधान

इस बार 13 अक्टूबर 2019 को शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा यानी कल सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत बरसाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा साल भर में शरद पूर्णिमा...

माता अनुसूया की पौराणिक कथा

अत्रि ऋषि की पत्नी और सती अनुसूया की कथा से अधिकांश धर्मालु परिचित हैं। उन की पति भक्ति तो लोक प्रचलित और पौराणिक भी है। जिसमें त्रिदेव ने उनकी परीक्षा...

प्रदोष व्रत पूजा, अनुष्ठान, व्रत का महत्व एवं लाभ

प्रदोष व्रत को देश के विभिन्न हिस्सों में लोग पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ इस व्रत का पालन करते हैं। यह व्रत भगवान शिव और देवी पार्वती के सम्मान...

पापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi) की कथा, व्रत विधि एवं महत्व

पापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi) का हिन्‍दू धर्म में बड़ा महात्‍म्‍य है. इस दिन सृष्टि के रचयिता भगवान विष्‍णु की पूजा और मौन रहकर भगवद् स्मरण तथा भजन-कीर्तन करने का विधान...

प्रदोष व्रत ,पूजा महत्व

गुरुवार का दिन होने वाले प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष व्रत...

श्री दुर्गा चालीसा (Shri Durga Chalisa )

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को अधिक...

शिव मानस पूजा (शिव जी की मानसिक पूजा)

रत्नौ: कल्पित  मासनं हिम-जलै: स्नानं च दिव्याम्बरं नान -रत्न विभूषितमं मृगमदामोदांकितं चन्दनं । जाती -चम्पक -बिल्व-पत्र रचितं पुष्पं च धूपं तथा, दीपं देव दयानिधे पशुपते हृत -कल्पित गृह्लाताम् ।। (1)...