विजया एकादशी का महत्व ( पूजा,व्रत कथा)





फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम विजया एकादशी है  विजया एकादशी का विशेष महत्व है इस व्रत को करने से मानव अपने जीवन में ,अपने लक्ष्य में विजय प्राप्त करता है।  नारद जी वोले  कि  परमपिता आप हमको विजया एकादशी की कथा और महत्व बताइए ।   प्रभु वोले कि जब भगवान राम वनवास में थे और माता सीता का हरण हो जाने के बाद  वे सीता जी को खोज रहे थे  खोजते -खोजते वे वन में जटायू से मिले  । माता सीता के हरण के विषय में बता कर जटायू ने प्राण त्याग दिए । राम जी सीता को खोजते हुए आगे बढ़े तो उनकी मित्रता सुग्रीव और हनुमान जी से हुई ।  हनुमान जी ने माता सीता का पता लगाया कि माता सीता लंका में हैं। भगवान राम जी ने लंका पर चढ़ाई करने का विचार किया

रामजी बोले कि हे लक्ष्मण समुद्र तो बहुत बड़ा है इसे कैसे पार किया जाएगा । लक्ष्मण जी बोले पास में ही एक ऋषि की कुटी है चल कर उन से ही कोई उपाय पूछते है । रामजी अपने भाई के साथ ऋषि की कुटी पर पहुँचे  ऋषि को  दण्डवत  प्राणाम  किया । ऋषि बोले आइए राम ,आसन ग्रहण कीजिए और बताइए कैसे आना हुआ । राम जी बोले कि हे ऋषिवर  हमको समुद्र के उस पार जाना है  और समुद्र बहुत बड़ा है। ऋषि बोले अगर आप अपने मंत्री व पूरी सेना  सहित  फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी  का  व्रत करते है तो आप अवश्य ही अपने कार्य में  विजय प्राप्त करेंगे । क्योंकि  विजया एकादशी के व्रत को करने  से मनुष्य को अपने लक्ष्य में  विजय प्राप्त होती है  । विजया एकादशी सब मनोकमनाओं को पूरा करने वाली और विजय कराने वाली होती है।

ओम नमो भगवते बासुदेवाय

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