नरक चतुर्दशी का व्रत,पूजा एवं दीपक जलाने का महत्व october 2019








दिवाली से एक दिन पहले कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन को छोटी दिवाली, रूप चतुर्दशी और यम दीपावली के नाम से भी पहचाना जाता है। इस दिन शाम को मत्यु के देवता यमराज के नाम से भी एक दीपक जलाने की परंपरा है ।कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को उपरोक्त कारणों से नरक चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी और छोटी दीपावली के नाम से जाना जाता है। और इसके बाद क्रमशः दीपावली, गोधन पूजा और भाई दूज मनायी जाती है।



नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहते हैं। इसे छोटी दीपावली इसलिए कहा जाता है क्योंकि दीपावली से एक दिन पहले, रात के वक्त उसी प्रकार दीए की रोशनी से रात के तिमिर को प्रकाश पुंज से दूर भगा दिया जाता है जैसे दीपावली की रात को। इस रात दीए जलाने की प्रथा के संदर्भ में कई पौराणिक कथाएं और लोकमान्यताएं हैं। (एक कथा के अनुसार आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। इस उपलक्ष में दीयों की बारत सजायी जाती है।)

मान्यता है कि ऐसा करने से घर के पूर्वज प्रसन्न होकर अपना आशीष घर के सभी सदस्यों पर हमेशा बनाए रखते हैं। हालांकि इस दिन एक काम करने की सख्त मनाही होती है, जिसे भूलकर भी किसी व्यक्ति को नहीं करना चाहिए अन्यथा सुख-समृद्धि की हानि होती है। आइए जानते हैं आखिर क्या है वो एक चीज।
नरक चतुर्दशी के दिन भूलकर भी अपने घर को खाली नहीं छोड़ना चाहिए। अगर किसी जरुरी काम से आपको बाहर जाना ही पड़े तो कोशिश करें घर में आपके अलावा कोई न कोई अवश्य मौजूद रहे। घर में समृद्धि का वास बनाए रखने और अकाल मत्यु से बचने के लिए आज के दिन नरक चतुर्दशी पर घर की दक्षिण दिशा में एक दीपक में कौड़ी, 1 रूपये का सिक्का रखकर जलाकर यमराज से अकाल मत्यु से बचने के लिए प्रार्थना करें।



यह त्यौहार नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी या नर्का पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन प्रातःकाल तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियाँ जल में डालकर स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है। विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो स्वर्ग को प्राप्त करते हैं।
शाम को दीपदान की प्रथा है जिसे यमराज के लिए किया जाता है। दीपावली को एक दिन का पर्व कहना न्योचित नहीं होगा। इस पर्व का जो महत्व और महात्मय है उस दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण पर्व व हिन्दुओं का त्यौहार है। यह पांच पर्वों की श्रृंखला के मध्य में रहने वाला त्यौहार है जैसे मंत्री समुदाय के बीच राजा। दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस फिर नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली फिर दीपावली और गोधन पूजा, भाईदूज।

इस दिन के व्रत और पूजा के संदर्भ में एक अन्य कथा  हैकि रन्ति देव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था लेकिन जब मृत्यु का समय आया तो उनके सामने यमदूत आ खड़े हुए। यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हुए और बोले मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो क्योंकि आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नर्क जाना होगा। आप मुझ पर कृपा करें और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है। पुण्यात्मा राजा की अनुनय भरी वाणी सुनकर यमदूत ने कहा हे राजन् एक बार आपके द्वार से एक भूखा ब्राह्मण लौट गया यह उसी पापकर्म का फल है।
दूतों के इस प्रकार कहने पर राजा ने यमदूतों से कहा कि मैं आपसे विनती करता हूं कि मुझे वर्ष का और समय दे दे। यमदूतों ने राजा को एक वर्ष की मोहलत दे दी। राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषियों के पास पहुंचा और उन्हें सब वृतान्त कहकर उनसे पूछा कि कृपया इस पाप से मुक्ति का क्या उपाय है। ऋषि बोले हे राजन् आप कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्रह्मणों को भोजन करवा कर उनसे अनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया। इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और उन्हें विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ। उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति हेतु भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल लगाकर और पानी में चिरचिरी के पत्ते डालकर उससे स्नान करने का बड़ा महात्मय है। स्नान के पश्चात विष्णु मंदिर और कृष्ण मंदिर में भगवान का दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायक कहा गया है। इससे पाप कटता है और रूप सौन्दर्य की प्राप्ति होती है।



नरक चतुर्दशी के दिन कैसे करें हनुमान जी की पूजा?
मान्‍यता के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन भगवान हनुमान ने माता अंजना के गर्भ से जन्‍म लिया था. इस दिन भक्‍त दुख और भय से मुक्ति पाने के लिए हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हैं. इस दिन हनुमान चालीसा और हनुमान अष्‍टक का पाठ करना चाहिए.
नरक चतुर्दशी को क्‍यों कहते हैं रूप चतुर्दशी?
मान्‍यता के अनुसार हिरण्‍यगभ नाम के एक राजा ने राज-पाट छोड़कर तप में विलीन होने का फैसला किया. कई वर्षों तक तपस्‍या करने की वजह से उनके शरीर में कीड़े पड़ गए. इस बात से दुखी हिरण्‍यगभ ने नारद मुनि से अपनी व्‍यथा कही. नारद मुनि ने राजा से कहा कि कार्तिक मास कृष्‍ण पक्ष चतुर्दशी के दिन शरीर पर लेप लगाकर सूर्योदय से पूर्व स्‍नान करने के बाद रूप के देवता श्री कृष्‍ण की पूजा करें. ऐसा करने से फिर से सौन्‍दर्य की प्राप्ति होगी. राजा ने सबकुछ वैसा ही किया जैसा कि नारद मुनि ने बताया था. राजा फिर से रूपवान हो गए. तभी से इस दिन को रूप चतुर्दशी भी कहते हैं.
क्या है नरक चतुर्दशी? इस दिन क्यों होती है कृष्ण-यमराज की पूजाः-

इस दिन भगवान कृष्ण की उपासना भी की जाती है क्योंकि इसी दिन उन्होंने नरकासुर का वध किया था.। दीपावली के एक दिन का पहले का दिन सौन्दर्य प्राप्ति और आयु प्राप्ति का होता है. इस दिन आयु के देवता यमराज की उपासना की जाती है और सौन्दर्य प्राप्ति का प्रयोग किया जाता है. इस दिन भगवान कृष्ण की उपासना भी की जाती है क्योंकि इसी दिन उन्होंने नरकासुर का वध किया था. कहीं कहीं पर ये भी माना जाता है की आज के दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था. जीवन में आयु या स्वास्थ्य की अगर समस्या हो तो इस दिन के प्रयोगों से दूर हो जाती है. इस बार नरक निवारण चतुर्दशी 26 अक्टूबर को मनाई जाएगी.
इस दिन का सम्बन्ध स्नान और सौंदर्य से किस प्रकार है?
इस दिन प्रातःकाल या सायंकाल चन्द्रमा की रौशनी में जल से स्नान करना चाहिए। इस दिन विशेष चीज़ का उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए। जल गर्म न हो ताजा या शीतल जल होना चाहिए। ऐसा करने से न केवल अद्भुत सौन्दर्य और रूप की प्राप्ति होती है। बल्कि स्वास्थ्य की तमाम समस्याएँ भी दूर होती हैं। इस दिन स्नान करने के बाद दीपदान भी अवश्य करना चाहिए।

नरक चतुर्दशी पर दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए किस प्रकार दीपक जलाएं?



नरक चतुर्दशी पर मुख्य दीपक लम्बी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए जलता है। इसको यमदेवता के लिए दीपदान कहते हैं घर के मुख्य द्वार के बाएं ओर अनाज की ढेरी रखें। इस पर सरसों के तेल का एक मुखी दीपक जलाएं। दीपक का मुख दक्षिण दिशा ओर होना चाहिए। अब वहां पुष्प और जल चढ़ाकर लम्बी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें
नरक चतुर्दशी पर कर्ज मुक्ति के लिए किस प्रकार दीपक जलाएं?
रात्रि में हनुमान जी के सामने घी का एकमुखी दीपक जलाएं। इसके बाद हनुमान जी को उतने लड्डू का भोग लगायें जितनी आपकी उम्र है। फिर हनुमान जी के समक्ष बैठकर 9 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। अगले दिन सुबह सारा प्रसाद बच्चों में बाँट दें , या गाय को खिला दें।
नरक चतुर्दशी पर हर प्रकार के बाधा नाश के लिए किस प्रकार दीपक जलाएं?
शाम के समय भगवान कृष्ण के समक्ष घी का एक चौमुखी दीपक जलाएं। इसके बाद उन्हें पंचामृत का भोग लगाएं। “ॐ क्लीं कृष्णाय नमः” का कम से कम 3 माला जाप करें, इसके बाद जिस भी तरह की बाधा जीवन में आ रही हो , उसके नाश की प्रार्थना करें। तीन बार शंख बजाएं और पंचामृत ग्रहण करें
नरक चतुर्दशी पर क्या सावधानियां रखें?
मुख्य द्वार पर एक ही बड़ा सा सरसों के तेल का एक मुखी दीपक जलाएं। इस दिन के पहले ही घर की साफ सफाई कर लें। अगर ज्यादा पूजा उपासना नहीं कर सकते तो कम से कम हनुमान चालीसा जरूर पढ़ें। जो भी भोजन बनाएं. उसमें प्याज लहसुन का प्रयोग न करें
नरक चतुर्दशी पर करें कर्ज मुक्ति के उपायः-
नरक चतुर्दशी पर रात्रि को एक विशेष प्रयोग करें। हनुमान जी के सामने एक शुद्ध सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हूँ फट” का यथाशक्ति जप करें। जप के बाद हनुमान जी से कर्ज मुक्ति की प्रार्थना करें।

You may also like...